उपराष्ट्रपति पद पर विजयी हुए वेंकैया नायडू, राजस्थान से राज्यसभा सांसद नायडू की जीत का पूरा गणित समझिए

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आज हुए चुनाव के कुछ देर बाद ही आ गए। एन.डी.ए. उम्मीदवार वेंकैया नायडू ने यू.पी.ए. और साझा विपक्ष के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी को बड़े अंतर से हराया। यहाँ वेंकैया को जीत के लिए कुल मतदान का 50% + 1 वोट चाहिए था। सुबह 10 बजे से शुरू हुए मतदान में शाम 5 बजे तक कुल 98.21% वोटिंग हुई। वेंकैया नायडू को कुल 516 वोट मिले वहीँ गोपालकृष्ण गांधी को महज़ 244 मत ही मिले।

मतदान में राज्यसभा के 243 सदस्य और लोकसभा के 542 सांसद योग्य थे। बावजूद इसके 14 सांसदों ने मतदान नहीं किया। पिछले दो कार्यकाल से उपराष्ट्रपति रहने वाले हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को पूरा होगा। उनकी जगह वेंकैया नायडू भारत के उपराष्ट्रपति पदभार ग्रहण करेंगे। वेंकैया नायडू 11 अगस्त को शपथ लेकर कार्यभार ग्रहण करेंगे।

इस चुनाव में 790 नहीं 785 सांसद ही थे मतदान के लिए योग्य

उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा और लोकसभा के सभी सांसद मतदान करते हैं। वर्तमान में भारत की लोकसभा में 545 सीट है वहीँ राज्यसभा में 245 सांसद है। इस तरह कुल मिलाकर 790 सांसद होते है। प्रत्येक सांसद के मत का मूल्य इकाई होता है। कुल 790 में से 771 सांसदों ने ही मतदान किया। क्योंकि अभी हमारी लोकसभा की कुल 545 में से 2 सीट खाली हैं। इसी के साथ लोकसभा के एक सांसद छेदी पासवान को न्यायलय ने अयोग्य घोषित कर दिया है। इस वजह से सिर्फ 542 सांसद ही मतदान कर सकते थे।

दूसरी तरफ राज्यसभा के कुल 245 सदस्यों में से दो सीट अभी खाली है। इस कारण यहाँ से भी 243 सांसद ही मतदान कर सकते थे। इस प्रकार कुल (542+243)= 785 सांसद आज अपना मत प्रयोग कर भारत का नया उपराष्ट्रपति चुन सकते थे। लेकिन स्थिति कुछ ऐसी बनी कि 785 में से भी 14 सांसदों ने अपने मत का प्रयोग नहीं किया।

इन सांसदों ने नहीं किया मतदान

आज संपन्न हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा और लोकसभा के कुल मिलाकर 785 मतदान योग्य सांसदों में से भी 14 सांसदों ने वोट नहीं डाला। इस तरह कुल 771 वोट पड़े।

भाजपा से विजय गोयल और सांवरलाल जाट ने तबियत खराब होने की वजह से मतदान नहीं किया। कांग्रेस से मौसम नूर और रानी नारा ने भी मत नहीं डाला। तृणमूल कांग्रेस से कुणाल कुमार घोष, तापस पॉल, प्रोतिमा मंडल और अभिषेक बनर्जी ने मतदान नहीं किया। इंडियन युनियन मुस्लिम लीग के अब्दुल वहाब और पीके कुल्हालीकुट्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उदयनराजे भोंसले, पतली मक्कल कत्छी पार्टी से अंबुमणि रामदास और निर्दलीय सांसद अनु आगा, नबा कुमार सारनिया ने मतदान नहीं किया।

19 विपक्षी दलों का समर्थन के बावज़ूद हारे गोपालकृष्ण गांधी

उपराष्ट्रपति पद पर जब गोपालकृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाया गया तो कांग्रेस के नेतृत्व में देश के 19 राजनैतिक दलों ने गोपालकृष्ण गांधी को समर्थन दिया था। लेकिन इन दलों के पास कुल मिलाकर भी भाजपा से ज़्यादा मत नहीं थे। इस कारण विपक्ष के साझा प्रयास के बावज़ूद गोपालकृष्ण गांधी को हार का सामना करना पड़ा। पूर्व आईएएस और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद के लिए दावेदार बनाने के लिए कांग्रेस की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम, नेशनल कॉन्फ्रेंस, समाजवादी पार्टी, बसपा, जनता दल सेक्यूलर, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जनता दाल यूनाइटेड (जदयू) समेत देश की 19 राजनैतिक पार्टियां एकजुट हुई थी। लेकिन इन सभी के संयुक्त वोट भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन समूह एनडीए से कम ही रहे।

राजस्थान से सांसद है वेंकैया

वेंकैया नायडू साल 2016 से संसद के उच्च सदन राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए दावेदार बनने से पहले तक नायडू भारत सरकार में शहरी विकास मंत्री का कार्यभार संभाल रहे थे। अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में वेंकैया नायडू ग्रामीण विकास मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। वेंकैया नायडू का राजस्थान से बहुत लगाव रहा है। राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा क्रियान्वित किए जाने वाले अनेक विकास कार्यक्रमों में नायडू विशिष्ठ अतिथि के रूप में भाग लेते रहे हैं। राज्य सरकार की जनहित में समर्पित योजनाओं व सुविधाओं में नायडू अक्सर अपना मार्गदर्शन देते रहे हैं। प्रदेश में आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में अक्सर ऐसे अवसर आए हैं जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और वेंकैया नायडू ने एक मंच साझा किया है।